निस्वार्थ सेवा का महत्व

हमने अपने पिछले ब्लॉग में ये सिखा की अपने काम पे ही हमेशा ध्यान देना चाहिए | आप जिस भी उद्देश्य के साथ इस पृथ्वी पे जन्म लिए है उसको पूरा करना है, लेकिन लोग इस लोक के मोह जाल में फसे हुए है|लोग लगे हुए है एक दूसरे को नीचा दिखाने में, खूब सारा धन कमाने में, परन्तु सच कुछ और है|

एक बहुत प्यारी कहानी है श्री गुरु नानक देव जी की जिसमे जब वो थोड़े बड़े हुए तो उनके पिता मेहता कालू जी ने उनको बीस रूपये दिए और और कहा, “जाओ और अच्छा सौदा करो, यानी अच्छा व्यापार करो| जब ​​गुरु जी व्यापार करने जा रहे थे, तो रास्ते में उन्हें संतों का एक समूह मिला| संतों ने बताया कि वे कई दिनों से भूखे हैं| गुरु नानक जी ने अपने पिता से मिले पैसों से संतों की मदद करने का फैसला लिया| नानक जी ने अपनी जेब से पैसे निकाले और संतों को देने लगे| यह देखकर संतों ने कहा कि उन्हें पैसे नहीं चाहिए, बल्कि वे भूखे हैं| उन्हें अपनी भूख मिटाने के लिए भोजन चाहिए|उन्होंने उस धन से भोजन तैयार कराया और संन्यासियों के पास ले आए। फ़कीरों को भोजन कराने के बाद वे खाली हाथ घर लौट गए।

जीवन का सच्चा सौदा जरूरतमंदों के साथ अपनी कमाई साझा करना और हर संभव तरीके से उनकी मदद करना है। गुरु नानक के कार्यों ने यह सिद्ध किया कि वास्तविक धन निस्वार्थ सेवा और दूसरों के प्रति करुणा में निहित है, जो अंततः सच्ची आध्यात्मिक और नैतिक संतुष्टि की ओर ले जाता है।

Comments

Leave a Reply

Discover more from Little Light Stories

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading